लूट के बाद पहचानने पर गोली मारकर हत्या में 1 आरोपी को उम्र कैद, 2 दोषमुक्त, मौत से पहले मृतक ने दे दी थी पुलिस को दी गवाही

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आजमगढ़ : लूट के बाद हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने एक आरोपी को आजीवन कारावास तथा चालीस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि पर्याप्त सबूत के अभाव में दो आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 3 जैनेंद्र कुमार पांडेय ने शनिवार को सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा सुनील तिवारी निवासी मुड़हर ने 12 सितंबर 2006 को थाना गंभीरपुर पर सूचना दी की उनके पिता बनारसी तिवारी को महेंद्र यादव निवासी बिजौली थाना बरदह ने गोली मार दी है। उन्हें ठेकमा ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया है। इस सूचना पर तत्कालीन थानाध्यक्ष कृष्ण मोहन सिंह तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे। बनारसी तिवारी ने थानाध्यक्ष कृष्णमोहन सिंह को बताया कि महेंद्र यादव उन्होंने कुछ रुपए उधार दिए थे। महेंद्र यादव ने जानबूझकर देर से पैसा उन्हें दिया। जब मैं अपने गांव की सरहद में प्रवेश कर रहा था तब दो लोगों ने रास्ता रोक लिया और कट्टा सटा कर रुपया छीनने लगे। जब मैं उन दोनों को देखा तो पहचान गया कि यह शिवानंद राय निवासी हरिश्चंदपट्टी थाना गंभीरपुर और मिर्जापुर के प्रधान अजय राय उर्फ शुद्धू राय थे। पहचान लिए जाने के बाद शिवानंद ने बनारसी तिवारी को गोली मार दी । इसके बाद घायल बनारसी तिवारी को बेहतर इलाज के लिए वाराणसी रेफर कर दिया गया। वाराणसी ले जाते समय बनारसी तिवारी की मौत हो गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद अजय राय तथा शिवानंद राय के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत किया। बाद में अदालत में महेंद्र यादव को भी बतौर मुलजिम विचारण के लिए तलब किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता अश्विनी राय ने कुल आठ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों के दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी शिवानंद राय को आजीवन कारावास तथा चालीस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि पर्याप्त सबूत के अभाव में अजय राय उर्फ शुद्धू राय तथा महेंद्र यादव को दोष मुक्त कर दिया।

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