
आजमगढ़: महराजगंज से सतिराम की रिपोर्ट,
स्थानीय विकासखंड का देवारांचल क्षेत्र गन्ना उत्पादन का एक प्रमुख क्षेत्र है, जहां किसान वर्ष भर अपनी मेहनत से गन्ने की पैदावार करता है जिसे बेचकर बेटी की शादी व अन्य जरूरतों को पूरा करने की सोचता है । किंतु गन्ना विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते समय से पर्ची न मिलने तथा भुगतान न होने के कारण किसानों को अपना गन्ना औने पौने दामों पर बिचौलियों के हाथों बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है जिसका नाजायज तरीके से जिम्मेदारों द्वारा किसानों का शोषण किया जाता है ।
ऐसा ही शुक्रवार की रात महराजगंज में देखने को मिला जहां देवारांचल क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन किसान अपने गन्ने को लेकर अंबेडकर नगर में किसी क्रॉसर पर बेचने के लिए जा रहे थे तभी मुख्य गन्ना अधिकारी तीन गाड़ियों से लगभग दर्जन भर लोगों के साथ पहुंचकर राजेसुल्तानपुर रोड स्थित उसुर कुढ़वा के पास ट्रालियों को पकड़ कर गन्ना सहित किसानों को थाने में बंद करा दिया । किसानों ने ट्रैक्टर चालक तथा खुद के साथ उनके लोगों द्वारा मारपीट करने का भी आरोप लगाया । इस बात की जानकारी जब ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि पारसनाथ यादव को हुई तो वह दोपहर लगभग 12 बजे थाने पर पहुंचे और सीसीओ से बात कर किसानों के साथ सामंजस्य बैठाने का अनुरोध किया । काफी देर बाद लगभग 3:30 बजे गन्ना आयुक्त डा० वीपी सिंह थाने पर पहुंचे और किसानों से बात करना शुरू किया । इस दौरान किसानों ने गन्ना बेचने के लिए समय से पर्ची न मिलने, बेचे गए गन्ने का भुगतान न होने तथा पर्ची आने के बाद मात्र 72 घंटे में गन्ना तैयार करने में हो रही मुश्किलों के बाबत जानकारी दिया । किंतु उक्त अधिकारी समस्याओं के समाधान के बजाय अपनी असमर्थता व्यक्त करते हुए मिल के घाटे का रोना रोते रहे । इस दौरान थाने पर बैठाये गये किसान बैठाये गए किसान अमरजीत यादव पुत्र रामाश्रय निवासी हरपुरा खास, बंटाई किसान शैलेश यादव पुत्र स्वर्गीय रामकवल निवासी बनौरा थाना जीयनपुर, अंकित मिश्र पुत्र सुरेश मिश्र रोशनगंज, अवनीश यादव पुत्र प्रभुनाथ यादव निवासी आराजी हुकहिया द्वारा गन्ना छोड़ने तथा मार-पीट के मामले में न्याय की बात कही गयी । सैकड़ो किसान तथा प्रमुख सहित आधा दर्जन ग्राम प्रधानों द्वारा गन्ना अधिकारी के साथ लगभग पांच बजे तक चली जद्दोजहद के बाद गन्ना अधिकारी द्वारा थाने में बंद गन्ने को सम्बन्धित किसान द्वारा अपने किसी परिचित के कोड पर बेचने तथा भविष्य में पर्चियां को बढ़ाकर गन्ना खरीदने का आश्वासन दिया गया तब जाकर मामला शांत हुआ। पत्रकारों द्वारा उनसे उनके लोगों द्वारा किसानों के साथ मारपीट के बारे में पूछा गया तो वह जवाब देने के बाद नो कमेंट कहते हुए चले हुए ।
