बैंक कर्मचारी द्वारा निवेश के नाम पर लाखों की ठगी के मामले में आरोपी के सरेंडर न करने पर ढोल बजवा कर ऐलान कर पुलिस ने नोटिस की चस्पा

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आरोपी इंडसइंड बैंक का कर्मचारी दीनदयाल उपाध्याय बताया जा रहा है जो शेयर मार्केट में सुरक्षित रिटर्न का झांसा देकर 23.29 लाख रुपये ठग लिया।

ऑनलाइन और नकद दोनों तरीकों से पैसा लिया साथ ही रिश्तेदारों के खातों में भी पैसे ट्रांसफर कराने का आरोप है।

आरोपी का ट्रेडिंग अकाउंट ‘धन ऐप’ पर रजिस्टर्ड मिला।

गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी फरार है। लगभग अब तक करोड़ से ऊपर की ठगी करने की बात आई है।

न्यायालय ने धारा 84 बीएनएसएस के तहत कुर्की के आदेश जारी किए।

आरोपी पर बहन से भी करीब 60 लाख की ठगी का गंभीर आरोप।

आजमगढ़ बैंक कर्मचारी द्वारा निवेश के नाम पर लाखों की ठगी का मामला आया था। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। अब फरार चल रहे आरोपी के खिलाफ न्यायालय से धारा 84 बीएनएसएस के तहत कुर्की की कार्यवाही के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

पूरा मामला आजमगढ़ जनपद के कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। पीड़ित अमित यादव और उनके मित्र अभिषेक यादव ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ को दिए गए प्रार्थना पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि उनकी मुलाकात सिविल लाइन स्थित इंडसइंड बैंक आजमगढ़ में कार्यरत कर्मचारी दीनदयाल उपाध्याय से हुई थी।

पीड़ितों के अनुसार, वे बैंक में खाता खुलवाने और एसआईपी निवेश के उद्देश्य से बैंक पहुंचे थे। इसी दौरान आरोपी दीनदयाल उपाध्याय ने खुद को बैंक कर्मचारी बताते हुए उन्हें शेयर मार्केट में निवेश करने का झांसा दिया। शुरू में दोनों ने मना किया, लेकिन आरोपी ने बैंक का नाम लेकर भरोसा दिलाया कि वह बैंक में कार्यरत है और 10 से 15 प्रतिशत तक का सुरक्षित रिटर्न दिलवाएगा।

आरोप है कि आरोपी की बातों में आकर दोनों पीड़ितों ने धीरे-धीरे कर के कुल 23 लाख 29 हजार 500 रुपये उसे दे दिए। यह रकम ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के साथ-साथ नकद रूप में भी दी गई। पीड़ितों ने बताया कि अलग-अलग खातों में पैसे भेजे गए, जिनकी पूरी पेमेंट हिस्ट्री आवेदन के साथ संलग्न है।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने परिवार के सदस्यों — बहन, माता और रिश्तेदारों के खातों में भी रकम ट्रांसफर करवाई। आरोपी का ट्रेडिंग अकाउंट ‘धन ऐप’ पर रजिस्टर्ड पाया गया है, साथ ही पैन कार्ड और मोबाइल नंबर भी पुलिस के पास मौजूद हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने अपराध संख्या 534/25 अंतर्गत धारा 318(4) और 316(5) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया। विवेचना में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयो करते हुए कपटपूर्वक पीड़ितों की धनराशि का गबन किया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार फरार चल रहा है और अपनी चल-अचल संपत्ति को ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहा है। कई बार दबिश देने के बावजूद आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लगा। इसके बाद विवेचक द्वारा न्यायालय में धारा 84 बीएनएसएस के तहत आदेशिका जारी करने की याचना की गई।

न्यायालय ने केस डायरी, पुलिस प्रपत्र और विवेचक के शपथ पत्र का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट पहले ही जारी हो चुका है और उसके फरार होने के ठोस साक्ष्य मौजूद हैं। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी के खिलाफ धारा 84 बीएनएसएस के अंतर्गत कुर्की की कार्यवाही के आदेश जारी कर दिए।

अदालत ने निर्देश दिया है कि नियमानुसार मुनादी कराई जाए, आदेशिकाएं चस्पा की जाएं और कार्यवाही के दौरान आरोपी के परिवार की महिला सदस्यों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार न किया जाए।

यह मामला बैंकिंग सिस्टम की साख पर भी सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं और पीड़ितों की धनराशि वापस दिलाने के लिए सभी कानूनी विकल्प अपनाए जाएंगे। अब देखना यह होगा कि फरार आरोपी कब तक कानून की पकड़ से बाहर रहता है।

बहरहाल, इसके अलावा भी कई और लोगों के साथ ठगी का काम किया , यहां तक की अपनी बहन के साथ लगभग 60 लाख का ठगी दीनदयाल उपाध्याय द्वारा कियागया ।

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