मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अंबेडकर जयंती पर कई प्रतिमा स्थल तक पहुंचकर दी श्रद्धांजलि और सपा पर बोला हमला

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अतरौलिया (आशीष कुमार निषाद): पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनके योगदान को याद किया। निरीक्षण भवन में बाबा साहब के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के बाद मंत्री ने वैश्यपुर, गोपाली पट्टी, भैरोपुर दरगाह सहित अन्य स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया और अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल 1891 को जन्मे बाबा साहब ने देश को जो दिया, उसे शब्दों में समेटना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, “ना रब ने दिया ना रहमान ने दिया, जो कुछ भी दिया बाबा साहब डॉ. अंबेडकर जी ने दिया।” उन्होंने आगे कहा कि आज देश में वोट का अधिकार बाबा साहब की देन है, जिसकी बदौलत सरकारें बनती हैं और देश-प्रदेश का विकास होता है। राजभर ने कहा कि बाबा साहब 32 भाषाओं के ज्ञाता थे, लेकिन 1984 से पहले देश के केवल 5 प्रतिशत लोग ही उन्हें जानते थे। उन्होंने बताया कि जब कांशीराम पंजाब से उत्तर प्रदेश आए और आंदोलन शुरू किया, तब पूरे देश में बाबा साहब के विचारों का प्रसार हुआ। इसी आंदोलन के बाद संसद में बाबा साहब की प्रतिमा स्थापित हुई और दुनिया को उनके महान योगदान की जानकारी मिली।
मंत्री राजभर ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि नोएडा के प्रदर्शन में कर्मचारियों से ज्यादा सपा के “गुंडे” शामिल होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के लोग हमेशा उपद्रव करते हैं और दोहरी राजनीति करते हैं। उन्होंने आजमगढ़ की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि सपा के एक नेता द्वारा बाबा साहब की मूर्ति तोड़ी गई, जो उनके विचारों को तोड़ने जैसा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सपा बाबा साहब को मानने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उनकी मूर्तियों को नुकसान पहुंचाती है। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि जब अनुसूचित जाति और जनजाति के प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा आया था, तब सपा ने सदन में बिल फाड़ दिया था। उन्होंने कासगंज का नाम बदलकर “कांशीराम नगर” किए जाने और बाद में उसे फिर बदलने को भी सपा की दोहरी नीति बताया।
राजभर ने सपा शासनकाल पर हमला बोलते हुए कहा, “सूप बोले तो बोले, चलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद हो।” उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगे का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश में दंगे, हत्याएं और पलायन हो रहा था, जबकि नेता जश्न में व्यस्त थे। उन्होंने दावा किया कि सपा के पांच साल के शासन में 1000 दंगे हुए और 1200 लोगों की जान गई, जबकि वर्तमान में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नौ साल में एक भी दंगा नहीं हुआ और कहीं कर्फ्यू नहीं लगा।
राजभर ने सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” के तहत काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की गई है—करीब 13 हजार से बढ़ाकर 16 हजार रुपये किया गया है। इसके अलावा शिक्षामित्रों की सैलरी 20 हजार और अनुदेशकों की 18 हजार रुपये कर दी गई है।
अखिलेश यादव के 10 साल के सवाल पर जवाब देते हुए राजभर ने कहा कि पहले वे अपने पांच साल के कार्यकाल का हिसाब दें और बताएं कि पिछड़ों और दलितों की छात्रवृत्ति क्यों नहीं दी गई।
इस दौरान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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