






आजमगढ़। धोखाधड़ी के एक चर्चित मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास तथा 91 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने अर्थदंड की पूरी धनराशि पीड़ित को दिए जाने का आदेश भी दिया है।यह फैसला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-11 के न्यायाधीश अंकित वर्मा ने शनिवार को सुनाया।अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी इमरान अहमद निवासी टेउंगा, थाना फूलपुर की मुलाकात आरोपी सुभाष चौबे निवासी गंभीरवन, थाना जहानागंज से हुई थी। आरोपी ने इमरान अहमद को जमीन खरीद-फरोख्त के व्यवसाय में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी पर पार्टनर बनाने का प्रस्ताव दिया। विश्वास दिलाने के लिए आरोपी ने लखनऊ स्थित एक ट्रस्ट की पावर ऑफ अटॉर्नी से संबंधित दस्तावेज भी दिखाए।आरोपी के झांसे में आकर इमरान अहमद ने 2 फरवरी 2008 को सुभाष चौबे के साथ लिखित एग्रीमेंट कर लिया। इसके बाद इमरान अहमद ने विभिन्न किश्तों में आरोपी को कुल 1 करोड़ 24 लाख रुपये दिए। हालांकि लंबे समय तक कोई जमीन नहीं खरीदी गई। इस पर वादी ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने कुछ चेक दिए, जो बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर बाउंस हो गए।इसके बाद पीड़ित इमरान अहमद ने 7 दिसंबर 2010 को थाना फूलपुर में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी अरविंद कुमार राठी तथा अधिवक्ता प्रशांत राय ने कुल सात गवाहों को न्यायालय में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आरोपी सुभाष चौबे को दोषी ठहराया।अदालत ने आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ 91 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने आदेश दिया कि अर्थदंड की पूरी राशि पीड़ित इमरान अहमद को प्रतिकर के रूप में प्रदान की जाए।यह फैसला लंबे समय से चल रहे धोखाधड़ी के मामले में पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
