CM के कार्यक्रम से पहले स्थल के समीप फॉल्ट ठीक करने में पोल से गिरे संविदा लाइनमैन की उपचार के दौरान मौत, आजमगढ़ से लेकर लखनऊ तक कराया इलाज नहीं आया काम, परिवार पर वज्रपात

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आजमगढ़ पटवध से बबलू राय

बिजली का खंभा बना काल: संविदा लाइनमैन की दर्दनाक मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

आजमगढ़ जनपद के कंधरापुर थाना क्षेत्र के मिरिया गांव में बिजली विभाग के कार्य के दौरान हुआ एक दर्दनाक हादसा आखिरकार एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ले गया। 52 वर्षीय संविदा लाइनमैन मुन्ना प्रजापति ने कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ी, लेकिन सोमवार की शाम करीब 7:30 बजे जिला अस्पताल आजमगढ़ में उन्होंने दम तोड़ दिया।
मृतक मुन्ना प्रजापति पुत्र स्वर्गीय लालचंद, ग्राम गौरीनारायणपुर के निवासी थे और वर्ष 2016 से आजमपुर पावर हाउस पर संविदा लाइनमैन के रूप में कार्यरत थे। वे अपने परिवार के मुख्य सहारे थे और उनके असमय निधन से घर में मातम छा गया है। परिजनों के अनुसार 5 अप्रैल की दोपहर लगभग 2 बजे मुन्ना प्रजापति मिरिया गांव में बिजली लाइन ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़े थे। तभी अचानक खंभे का निचला हिस्सा टूट गया और वे सीधे जमीन पर आ गिरे। गिरते ही उन्हें गंभीर चोटें आईं और वे बेहोश हो गए।
हादसे के तुरंत बाद परिजन उन्हें जिला अस्पताल आजमगढ़ लेकर पहुंचे, जहां हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें रेफर कर दिया। इसके बाद उन्हें बैठौली स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां भी हालत में सुधार न होने पर 7 अप्रैल को उन्हें फिर रेफर कर दिया गया।
परिजन उम्मीद लेकर उन्हें लखनऊ ले गए, लेकिन सरकारी अस्पताल में भर्ती न हो पाने के कारण मजबूरन निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ा। लगातार इलाज और बढ़ते खर्च ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह हिला दिया। इलाज के दौरान लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद कोई खास सुधार नहीं हुआ। आखिरकार आर्थिक तंगी से जूझते हुए परिजन 13 अप्रैल को उन्हें फिर जिला अस्पताल आजमगढ़ लेकर आए, जहां जिंदगी की आखिरी जंग लड़ते हुए सोमवार की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुन्ना प्रजापति अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में हर आंख नम है।
इस दर्दनाक घटना ने बिजली विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जर्जर खंभे पर काम कराने से पहले उसकी जांच क्यों नहीं हुई? क्या कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं? मुन्ना प्रजापति की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही की एक दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

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