






आजमगढ़ जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर आईमा गांव का रहने वाला मोसैब अहमद, जिसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी गतिविधियों की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया है, पिछले करीब 20 वर्षों से अपने गांव नहीं आया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर जिले का नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, मोसैब का परिवार लंबे समय से गांव से बाहर रह रहा है। उसके पिता इस्तखार अहमद शेख पहले मुंबई में रहते थे और पिछले छह वर्षों से सऊदी अरब में रह रहे हैं। गांव में उनका पुराना मिट्टी का घर भी करीब 20 साल पहले ही गिर चुका है। परिवार के कुछ सदस्य फिलहाल बिलरियागंज थाना क्षेत्र के नसीरपुर में रहते बताए जा रहे हैं।
दिल्ली की स्पेशल सेल ने जिन चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है, उनमें मोसैब अहमद के अलावा भुवनेश्वर का शेख इमरान, बिहार का सोहेल और मुंबई का मोहम्मद हम्माद शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए हैं और एक संगठित नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे।
कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी कट्टरपंथी सोच और नफरत फैलाने के मकसद से सक्रिय थे। ये लोग “गजवा-ए-हिंद” जैसे खतरनाक विचारों को बढ़ावा देने के साथ ही अन्य लोगों को भी उकसाने का काम कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी सोशल मीडिया के गुप्त ग्रुप्स से जुड़े हुए थे, जहां जिहाद, हथियारों और आतंकी गतिविधियों पर चर्चा होती थी।
रेकी के इनपुट और बरामदगी
स्पेशल सेल को यह भी इनपुट मिले हैं कि आरोपियों ने दिल्ली के संवेदनशील स्थानों जैसे इंडिया गेट और लाल किले की रेकी की थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। आरोपियों के पास से फर्जी आईडी बनाने से संबंधित सामान भी बरामद किया गया है।
साधारण परिवार से जुड़ाव
बताया जा रहा है कि चारों आरोपी साधारण परिवारों से जुड़े हैं और अधिक शिक्षित भी नहीं हैं, इसके बावजूद वे कट्टरपंथी नेटवर्क के संपर्क में आ गए।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इनके तार और किन-किन लोगों या संगठनों से जुड़े हैं।
