डीएफओ कार्यालय में एंटी करप्शन का बड़ा एक्शन: पेड़ कटान की अनुमति के नाम पर रिश्वत लेते स्टेनो गिरफ्तार, वन विभाग में मचा हड़कंप

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आजमगढ़। जनपद में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डीएफओ कार्यालय में तैनात एक स्टेनो को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि वह पेड़ कटान की ऑनलाइन अनुमति दिलाने के नाम पर आवेदक से घूस की मांग कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद वन विभाग सहित प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार मुबारकपुर थाना क्षेत्र निवासी मनोज विश्वकर्मा ने एंटी करप्शन संगठन से शिकायत की थी कि उनकी पेड़ कटान संबंधी ऑनलाइन फाइल को आगे बढ़ाने और अनुमति दिलाने के बदले डीएफओ कार्यालय में तैनात स्टेनो कपिलदेव यादव द्वारा रुपये की मांग की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की बात प्रथम दृष्टया सही पाई गई।
इसके बाद टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया। पूर्व निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता को 7,500 रुपये लेकर डीएफओ कार्यालय भेजा गया। बताया जाता है कि जैसे ही स्टेनो ने शिकायतकर्ता से रुपये लिए, पहले से निगरानी कर रही एंटी करप्शन टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे दबोच लिया।
यह कार्रवाई डीएफओ कार्यालय के मुख्य गेट के पास की गई, जहां आरोपी को रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद टीम उसे अपने साथ लेकर थाने पहुंची, जहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने और अन्य विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
एंटी करप्शन टीम के अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी कपिलदेव यादव सिधारी थाना क्षेत्र का निवासी है और वर्ष 2001 से वन विभाग में कार्यरत है। मामले में साक्ष्य जुटाने के साथ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी कर्मचारी के खिलाफ पहले भी रिश्वतखोरी के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि इन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने की चर्चा रही है। ऐसे में एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई ने वन विभाग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और एंटी करप्शन विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि रिश्वतखोरी का यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित था या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क भी सक्रिय था।

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