
आजमगढ़। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्या के मुकदमे में नामजद दो आरोपियों को विवेचक द्वारा क्लीनचिट दिए जाने पर जिला एवं सत्र न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने सुनवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को बतौर अभियुक्त (मुल्जिम) विचारण के लिए तलब कर लिया है। साथ ही विवेचक की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए प्रदेश के डीजीपी और आजमगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को उसके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराने का निर्देश दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विवेचना के दौरान विवेचक ने घोर लापरवाही, पक्षपातपूर्ण रवैया, उदासीनता और दुर्भावनापूर्ण तरीके से कार्रवाई की है।
मामले के अनुसार, अतरडीहा निवासी योगेंद्र सिंह ने अपने बड़े भाई तेजवीर सिंह की हत्या के मामले में पांच लोगों के खिलाफ मुबारकपुर थाने में नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि इब्राहिमपुर निवासी रामाश्रय चौरसिया को गाय खरीदने के लिए एडवांस रुपये दिए गए थे। 16 सितंबर 2024 को तेजवीर सिंह अपने भाई के साथ रुपये और गाय के संबंध में जानकारी लेने पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि गाय देवकली तारन निवासी रमेश दुबे को बेच दी गई है।
जब तेजवीर सिंह रमेश दुबे से मिलने गए, तभी रास्ते में पठान बस्ती के पास विवाद हो गया। आरोप है कि इसी विवाद के दौरान तेजवीर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
पुलिस ने विवेचना पूरी कर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की, लेकिन नामजद आरोपी रमेश दुबे और अमित दुबे का नाम आरोपियों की सूची से हटा दिया। इसके बाद वादी योगेंद्र सिंह ने अपने अधिवक्ता विंध्यवासिनी प्रसाद सिंह तथा जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी के माध्यम से न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद विवेचक ने जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से दोनों आरोपियों को क्लीनचिट दे दी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने वादी की अर्जी स्वीकार करते हुए रमेश दुबे और अमित दुबे को बतौर अभियुक्त 22 जुलाई को न्यायालय में तलब किया है।
साथ ही न्यायालय ने डीजीपी और एसएसपी को विवेचक के विरुद्ध आवश्यक विभागीय कार्रवाई कर उसकी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है।
