बरसात ने खोली बदहाल व्यवस्था की पोल, शहर से गांव तक जलभराव और टूटी सड़कें बनीं मुसीबत; केंद्रीय विद्यालय के सामने की सड़क सबसे खराब

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आजमगढ़। बरसात का मौसम शुरू होते ही आजमगढ़ में विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं की हकीकत सामने आने लगी है। जहां पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश से तबाही का मंजर है, वहीं आजमगढ़ जैसे मैदानी जिले में सामान्य बारिश ने ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी है। कई इलाकों में एक सप्ताह पहले हुई बारिश का पानी अब तक सड़कों पर जमा है, जिससे लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है।

शहर से लेकर गांव तक टूटी सड़कें, जलभराव और खराब जल निकासी व्यवस्था लोगों के लिए रोजाना की परेशानी बन गई है। लोगों का कहना है कि समस्या भारी बारिश की नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित बुनियादी व्यवस्थाओं की है। हल्की बारिश के बाद भी कई इलाके तालाब में तब्दील हो जाते हैं।

शहर के समीप स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, हीरापट्टी के सामने की सड़क सबसे खराब स्थिति में है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भरा हुआ है, जिससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। रोजाना सैकड़ों छात्र-छात्राएं, अभिभावक और शिक्षक इसी रास्ते से गुजरते हैं। बारिश के दौरान बच्चों को गिरते-पड़ते स्कूल आना-जाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्रीय विद्यालय केंद्र सरकार का प्रमुख शिक्षण संस्थान है और जिलाधिकारी इसके अध्यक्ष होते हैं, इसके बावजूद वर्षों से सड़क की हालत नहीं सुधर सकी।

इसी प्रकार हरड नगर कॉलोनी से शिब्ली कॉलेज जाने वाले मार्ग की स्थिति भी बेहद खराब है। पूरी सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और बारिश के बाद इनमें पानी भर जाने से वाहन चालकों के लिए रास्ता पहचानना मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक परेशान हैं और आए दिन फिसलकर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं।

शहर से सटे कोलघाट क्षेत्र की हालत भी किसी से छिपी नहीं है। घनी आबादी वाला यह इलाका ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है, लेकिन आबादी और जरूरतें शहर जैसी हैं। इसके बावजूद यहां सड़क और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बारिश के बाद रास्तों पर जलभराव हो जाता है और लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा शहर की कई गलियों और मोहल्लों में नालियों का गंदा पानी बारिश के पानी के साथ सड़कों पर बहता दिखाई देता है। कई स्थानों पर एक सप्ताह बाद भी पानी नहीं निकल पाया है, जिससे दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या केवल बरसात के दिनों की नहीं है, बल्कि वर्षों से बनी हुई है। हर साल बारिश के समय यही हालात देखने को मिलते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाते। लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्य शुरू कराने की मांग की है।

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