महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह संपन्न, 74 विद्यार्थियों को उपाधि और 88 पदक, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बेटियों की शिक्षा, एचपीवी टीकाकरण, रोजगारपरक शिक्षा और नशामुक्त भारत पर दिया जोर

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आजमगढ़। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में मंगलवार को महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। समारोह में 74 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 74 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 88 पदकों से सम्मानित किया गया। इनमें 14 विद्यार्थियों ने कुलाधिपति और कुलपति दोनों पदक हासिल किए। छात्राओं का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। 74 उपाधि प्राप्त करने वालों में 48 छात्राएं और 26 छात्र शामिल रहे।

समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, पद्म विभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार भी मौजूद रहे। राज्यपाल ने शिक्षकों द्वारा लिखी गई पुस्तकों और दीक्षांत स्मारिका का विमोचन किया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया।

राज्यपाल ने बताया कि विश्वविद्यालय ने 63,084 विद्यार्थियों की उपाधियां डिजिलॉकर पर अपलोड कर दी हैं, जिनमें 42,724 छात्राएं और 20,360 छात्र शामिल हैं। उन्होंने इसे डिजिटल शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

दीक्षांत समारोह के साथ राज्यपाल की प्रेरणा से संचालित एचपीवी टीकाकरण अभियान का भी विस्तार किया गया। आजमगढ़ और मऊ में करीब 2,000 बेटियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई गई। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर पूरे प्रदेश में एक करोड़ बेटियों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम में आजमगढ़ और मऊ के 500 आंगनबाड़ी केंद्रों को शिक्षण किट वितरित की गई। राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश में अब तक 73,793 आंगनबाड़ी केंद्रों को इस अभियान के तहत सुविधासंपन्न बनाया जा चुका है।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि डिग्री को शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत मानें। उन्होंने रोजगारपरक शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और आजीवन सीखते रहने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अल्पकालिक सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने का भी सुझाव दिया।

उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने, डिजिटल तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करने, साइबर अपराधों से बचने और संविधान में निहित मूल कर्तव्यों का पालन करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि “नशा नहीं, विकसित भारत का जुनून होना चाहिए।”

राज्यपाल ने छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार में बेटियां लगातार नई ऊंचाइयां छू रही हैं। वहीं उन्होंने छात्रों के अपेक्षाकृत कम प्रदर्शन पर गंभीर अध्ययन की आवश्यकता भी बताई।

समारोह में यह भी सामने आया कि सम्मानित होने वाले 74 मेधावी विद्यार्थियों में 59 ग्रामीण और 15 शहरी क्षेत्र से हैं, जो ग्रामीण प्रतिभाओं के बढ़ते योगदान का संकेत है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में डिजिटल प्रशासन, बायोमेट्रिक उपस्थिति, केंद्रीय पुस्तकालय, स्वास्थ्य केंद्र, डिजिटल मूल्यांकन और शोध गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि पारदर्शिता, गुणवत्ता और नवाचार के साथ यह विश्वविद्यालय भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाएगा।

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