हिंदी दिवस समारोह में कवियों ने बांधा समां, रचनाओं से गूंजा हिंदी प्रेम, प्रो. प्रभुनाथ सिंह ‘मयंक’ को मिला हरिऔध सम्मान, कवियों की प्रस्तुतियों ने बटोरी वाहवाही

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आजमगढ़। सरस्वती शिशु मंदिर कोलपांडेय में सोमवार को हरिऔध साहित्य सेवा संस्थान की ओर से हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। संस्थान के अध्यक्ष पं. सुभाष चंद्र तिवारी कुन्दन की अध्यक्षता और महामंत्री संजय कुमार पांडेय ‘सरस’ के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे।
कार्यक्रम में प्रख्यात साहित्यकार प्रो. प्रभुनाथ सिंह ‘मयंक’ को संस्थान की ओर से ‘हरिऔध सम्मान’ से सम्मानित किया गया। फ्यूचर इंडिया वेलफेयर के अध्यक्ष मनोज कुमार पांडेय, मुंबई के समाजसेवी राजेंद्र यादव, विद्यालय की प्रधानाचार्य शीला सिंह, संस्थान के संयुक्त मंत्री मनोज पांडेय, नेहा एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के सचिव रवि जायसवाल तथा आरएसएस के नगर प्रचार प्रमुख गिरीश सेठ ने कवियों को अंगवस्त्रम और सम्मानपत्र भेंट कर सम्मानित किया।
सुप्रसिद्ध कवि पं. सुभाष चंद्र तिवारी ‘कुन्दन’ ने अपनी रचना ‘है अनमोल धरोहर हिंदी, गर्व राष्ट्र को तुझ पर हिंदी, बनी राजभाषा भारत की, मधुमय सरल मनोहर हिंदी’ सुनाकर हिंदी के प्रति गौरव की भावना जगाई। उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे संजय कुमार पांडेय ‘सरस’ ने अपनी रचना ‘सारे विश्व में बोले जाने वाली भाषा है हिंदी, इसीलिए तो जन-गण-मन में गाने वाली भाषा है हिंदी’ प्रस्तुत कर खूब सराहना हासिल की। विजयेंद्र प्रताप ‘करुण’ ने ‘है भाषा हिंदी अति प्यारी, जिसे नमन शत बार, जिस भाषा ने मां के जैसा दिया है सबको प्यार’ के माध्यम से हिंदी की महत्ता को रेखांकित किया।
कु. श्रेया दूबे की रचना ‘हिंदी से है हिंदुस्तान और हिंदुस्तान है हिंदी, मेरे वतन की शान और मान है हिंदी’ ने भी श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा दिनेश श्रीवास्तव ‘दाहिर’, ताज आजमी, रुद्रनाथ चौबे ‘रुद्र’, लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’, राकेश पांडेय ‘सागर’, रत्नेश राय ‘रत्न’, संतोष पांडेय और देवेंद्र तिवारी ‘देव’ ने अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. प्रभुनाथ सिंह ‘मयंक’ ने हिंदी को राजभाषा के रूप में लागू किए जाने से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी को देश में व्यापक रूप से राजभाषा के रूप में लागू करने की अपेक्षा की गई थी, लेकिन आज भी यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो सका है। दिनेश श्रीवास्तव ‘दाहिर’ ने हिंदी के संबंध में डॉ. भीमराव आंबेडकर की अध्यक्षता में बनी समिति की अनुशंसाओं और 14 सितंबर 1949 के ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख किया।
अरविंद चित्रांश ने भोजपुरी को हिंदी की बहन बताते हुए इसकी भाषाई परंपरा को ऋग्वेद से जोड़ने की बात कही। वक्ताओं ने हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और जन-जन तक इसके व्यापक प्रयोग पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक रवि जायसवाल ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, दीपक जायसवाल, राजेश रंजन, अनुज श्रीवास्तव, अशोक तिवारी, उमेश चंद्र पांडेय, सुभाष श्रीवास्तव, विश्वदेव उपाध्याय, महंत संजय दास, राजनेत यादव, आलोक विश्वकर्मा, अभय त्रिपाठी, अजय पांडेय, अरुण यादव, विपिन कुमार, पूर्णमासी सोनकर, उमाशंकर पांडेय, संजय श्रीवास्तव, पूजा गुप्ता, आकांक्षा पांडेय, मंजू श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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