
आजमगढ़। मंडलीय जिला चिकित्सालय में पथरी के ऑपरेशन के बाद 15 वर्षीय किशोरी की मौत हो गई। मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के वार्ड में हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने सर्जन पर ऑपरेशन के नाम पर पांच हजार रुपये लेने और ऑपरेशन के बाद किशोरी की बिगड़ती हालत पर समुचित उपचार न करने का आरोप लगाया। मामले की जानकारी होने पर अस्पताल प्रशासन ने किसी तरह परिजनों को शांत कराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
निजामाबाद थाना क्षेत्र के शिवराजपुर गांव निवासी सूर्यभान पाल की 15 वर्षीय पुत्री पुष्पा पाल के पित्त की थैली में पथरी थी। परिजन उपचार के लिए उसे मंडलीय जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे थे। परिजनों के मुताबिक, इससे पहले सर्जन डॉ. संजय गोंड ने रिपोर्ट सही न होने की बात कहते हुए ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया था।
परिजनों का आरोप है कि एक अक्टूबर को वह दोबारा अस्पताल पहुंचे। ओपीडी में मौजूद सर्जन डॉ. ए.के. कुशवाहा ने बाहर से कुछ जांचें कराने के बाद एक स्टाफ के माध्यम से पांच हजार रुपये लिए और किशोरी का ऑपरेशन किया। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद पुष्पा की हालत में सुधार होने के बजाय लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों के अनुसार उसके शरीर से रक्तस्राव भी हो रहा था।
परिजनों का कहना है कि हालत बिगड़ने पर उन्होंने स्टाफ से चिकित्सक को बुलाने के लिए कहा, लेकिन उन्हें कथित तौर पर टाल दिया जाता रहा। उनका आरोप है कि सर्जन ने किशोरी के ठीक हो जाने का आश्वासन दिया, लेकिन उसकी हालत पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। मंगलवार की रात करीब दस बजे किशोरी ने अस्पताल के बेड पर दम तोड़ दिया।
मौत की जानकारी मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और वार्ड में हंगामा करने लगे। इससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सूचना पर मंडलीय जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. सतीश चंद्र कनौजिया मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। किशोरी की मौत से स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल प्रशासन की जांच के बाद मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
