






आजमगढ़: पॉक्सो अधिनियम के तहत मामलों की जांच में सहायक व्यक्तियों की सेवाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक बैठक मंगलवार को दीवानी न्यायालय के हॉल ऑफ़ जस्टिस में हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नीतिका राजन ने कहा कि पॉक्सो के मुकदमों में पीड़ित और उसके परिजनों की पहचान हर हालत में छुपानी होती है। इन मुकदमों की विवेचना बड़ी संवेदनशीलता के साथ होनी चाहिए। पॉक्सो एक्ट के तहत शोषण के पीड़ित बच्चों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मानसिक,भावनात्मक तथा विधिक सहयोग प्रदान करने हेतु सपोर्ट परसन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों की जांच में पुलिस,प्रोबेशन अधिकारी, अभियोजन अधिकारी बाल कल्याण समिति, जैसे सभी संस्थाओं को टीम भावना के साथ काम करना होगा।तभी पीड़ित पक्ष को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।इस बैठक में सभी थानों के चाइल्ड वेलफेयर से जुड़े सब इंस्पेक्टर,बाल कल्याण समिति, अभियोजन अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक,लीगल डिफेंस काउंसिल के सदस्य, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी इंस्पेक्टर उपस्थित रहे।
