



आजमगढ़। श्री अग्रवाल हितकारिणी न्यास ट्रस्ट, श्री अग्रवाल धर्मशाला एवं भंडार तथा श्री अग्रसेन पुस्तकालय के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सम्मान में सोमवार को पुरानी कोतवाली स्थित श्री अग्रवाल धर्मशाला में भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं एवं मातृशक्ति की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाराजा अग्रसेन जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इसके पश्चात बच्चों द्वारा मनमोहक गणेश वंदना प्रस्तुत की गई, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्री काशी अग्रवाल समाज के सभापति संतोष अग्रवाल उपस्थित रहे। उनका स्वागत विनोद अग्रवाल द्वारा अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री काशी अग्रवाल समाज वाराणसी की प्रधानमंत्री डॉ. सुश्री रचना अग्रवाल का स्वागत मंजू अग्रवाल ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे टी.एन. अग्रवाल का स्वागत रमेश अग्रवाल ने किया। वहीं श्री अग्रवाल हितकारिणी न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष अतुल अग्रवाल का स्वागत अजय अग्रवाल, श्री अग्रवाल धर्मशाला के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल का स्वागत मुकुंद अग्रवाल तथा श्री अग्रसेन पुस्तकालय के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल का स्वागत अनूप अग्रवाल द्वारा अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर किया गया।
मुख्य अतिथि संतोष अग्रवाल ने हाल ही में निर्वाचित हुए श्री अग्रवाल हितकारिणी न्यास ट्रस्ट, श्री अग्रवाल धर्मशाला एवं श्री अग्रसेन पुस्तकालय के सभी पदाधिकारियों को अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर समाज के उन युवा एवं वरिष्ठ सदस्यों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया जिन्होंने समाज के विकास और उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने समाज की एकता, शिक्षा, सेवा और संगठन को मजबूत बनाने पर बल दिया तथा नव निर्वाचित पदाधिकारियों से समाजहित में कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की।
कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र अग्रवाल ने किया। अंत में महाराजा अग्रसेन जी की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। समापन के उपरांत सभी उपस्थित लोगों के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई।
समारोह में अग्रवाल समाज के वरिष्ठ नागरिकों, युवा वर्ग एवं मातृशक्ति की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह एवं सामाजिक सौहार्द से परिपूर्ण रहा।
