
आजमगढ़। लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद आजमगढ़ जिले के कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। जिले में संचालित कई कोचिंग सेंटरों में बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। अधिकांश संस्थानों में प्रवेश और निकास के लिए एक ही रास्ता है, जबकि कई जगहों पर अग्निशमन उपकरण या तो उपलब्ध नहीं हैं अथवा उनकी वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार जिले में 100 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग के पास लगभग 50 कोचिंग संस्थान ही पंजीकृत हैं। बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान भी संचालित हैं जिनकी निगरानी और सुरक्षा मानकों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। लखनऊ की घटना के बाद कई कोचिंग सेंटरों में सतर्कता बढ़ी है, वहीं कुछ संस्थानों में ताले भी लटके मिले।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई मल्टीस्टोरी इमारतों में संचालित कोचिंग संस्थानों में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था नहीं है। किसी भी दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है। कई स्थानों पर अग्निशमन यंत्र तो लगे हैं, लेकिन उनका रखरखाव नहीं किया गया है।
अग्निशमन विभाग ने जिले भर में अभियान शुरू कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच तेज कर दी है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) विवेक शर्मा ने बताया कि जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों की कमी पाई जाएगी, उन्हें नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब और सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाएगा। निर्धारित समय सीमा में कमियां दूर नहीं किए जाने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि कोचिंग सेंटरों के साथ-साथ होटल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की भी जांच कराई जा रही है। सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सुरक्षा मानकों का पालन हो और भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
लखनऊ की घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता बढ़ी है। ऐसे में कोचिंग संचालकों से अपेक्षा की जा रही है कि वे सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें और विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
