कोटे की दुकान के प्रस्ताव को लेकर विवाद, रिश्तेदार के पक्ष में प्रक्रिया प्रभावित करने का आरोप, ग्रामीणों ने एडीओ पंचायत पर लगाया पद के दुरुपयोग का आरोप, निष्पक्ष प्रक्रिया कराने की मांग

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अतरौलिया/आजमगढ़। अतरौलिया थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कटोही में सार्वजनिक सस्ते गल्ले की दुकान के प्रस्ताव को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने नामित अधिकारी एडीओआरडी कृष्ण कुमार उपाध्याय पर कथित रूप से अपने रिश्तेदार के पक्ष में प्रस्ताव कराने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच और कड़ी सुरक्षा के बीच प्रस्ताव की प्रक्रिया कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत में सार्वजनिक सस्ते गल्ले की दुकान निरस्त होने के बाद नए सिरे से ग्रामसभा की खुली बैठक में प्रस्ताव कराया जाना है। 27 अगस्त को कोरम पूरा नहीं होने के कारण बैठक स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद दो सितंबर को दोबारा बैठक प्रस्तावित थी।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि इस बैठक में कोटे की दुकान के लिए प्रत्याशी सोनी तिवारी पत्नी सत्येंद्र तिवारी के ससुर शिव प्रकाश तिवारी अपने पक्ष में बाहरी लोगों को लेकर पहुंचे थे। ग्रामीणों द्वारा इसका विरोध किए जाने पर कथित रूप से गाली-गलौज और मारपीट की स्थिति पैदा हो गई। आरोप है कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से भी अभद्रता की गई और उनका डंडा छीनकर उन्हें धमकाने का प्रयास किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि विवाद पैदा कर ग्रामीणों को मौके से हटाने और इसके बाद अपने पक्ष में आसानी से प्रस्ताव कराने की कोशिश की गई। हालांकि अधिकांश ग्रामीणों के विरोध में खड़े होने पर चुनाव अधिकारी ने यह कहते हुए बैठक स्थगित कर दी कि प्रशासन का दबाव है।
प्रार्थना पत्र में ग्रामीणों ने नामित अधिकारी कृष्ण कुमार उपाध्याय और सोनी तिवारी के बीच रिश्तेदारी होने का दावा करते हुए निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर रिश्तेदार के पक्ष में प्रस्ताव कराने का प्रयास कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने शिव प्रकाश तिवारी पर धमकी देने का भी आरोप लगाया है। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि उन्होंने ग्रामीणों से कथित रूप से कहा कि बहू के पक्ष में प्रस्ताव कराने के लिए जरूरत पड़ी तो गोली भी चलानी पड़ेगी।
ग्रामीणों ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से मांग की है कि आगामी प्रस्ताव प्रक्रिया किसी अन्य अधिकारी की निगरानी में कराई जाए। साथ ही अतरौलिया थानाध्यक्ष की मौजूदगी में अन्य थानों की पुलिस फोर्स भी तैनात की जाए, ताकि ग्रामसभा की बैठक शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके।
हालांकि, प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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