
शौर्य की मौत पुलिस की गोली से नहीं, पिता अरविंद की गोली से हुई: पुलिस, सात घंटे तक बच्चों की जिंदगी की भीख मांगती रही पुलिस, नहीं पसीजा अरविंद; गोली चलने की आवाज के बाद तोड़ा गया कमरे का दरवाजा : पुलिस
आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शम्भूपुर में पत्नी समेत तीन लोगों की हत्या के बाद अपने तीन बच्चों को कमरे में बंधक बनाकर बैठे अरविंद के साथ पुलिस की करीब सात घंटे तक चली जद्दोजहद में नौ वर्षीय शौर्य की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शौर्य को पुलिस की गोली नहीं लगी थी, बल्कि उसके पिता अरविंद ने ही उसे गोली मारी थी। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल की परिस्थितियों, गोली की दिशा और रेस्क्यू की गई 11 वर्षीय बच्ची परी के बयान से भी यही तथ्य सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक शम्भूपुर में पत्नी समेत तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों और लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ कमरे में बंद हो गया था। पुलिस अधिकारी और परिवार के लोग लगातार उससे बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने तथा आत्मसमर्पण करने की अपील करते रहे। करीब सात घंटे तक समझाने के बावजूद वह कमरे से बाहर नहीं आया। इस दौरान वह बच्चों को गोली मारने की धमकी भी देता रहा।
देर रात कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बच्चों की जान को तत्काल खतरा देखते हुए एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने जोखिम उठाते हुए कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। कमरे में नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। पुलिस टीम उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शौर्य के शरीर पर गोली के प्रवेश वाले स्थान पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग और स्कॉर्चिंग के निशान मिले हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरह के निशान सामान्य तौर पर बेहद नजदीक से गोली चलने पर पाए जाते हैं। पुलिस टीम और बच्चों के बीच घटनाक्रम के समय करीब आठ से दस फीट की दूरी थी और आरोपी को निष्क्रिय किए जाने से पहले पुलिस का बच्चों के बेहद करीब पहुंचना संभव नहीं था।
पोस्टमार्टम में गोली की ट्रैजेक्टरी भी तिरछी और ऊपर की ओर पाई गई। पुलिस के अनुसार बच्चे की कम ऊंचाई को देखते हुए यह परिस्थितियां बेहद नजदीक से अपेक्षाकृत नीचे की दिशा से गोली चलाए जाने की ओर संकेत करती हैं। शौर्य के गाल से गोली के प्रवेश और सिर से निकलने की बात भी पोस्टमार्टम में सामने आई है।
पुलिस ने यह भी बताया कि पोस्टमार्टम में दर्ज एंट्री वुंड का आकार आरोपी के कब्जे में रही .32 बोर रिवाल्वर से संबंधित गोली के अनुरूप पाया गया है। घटनास्थल से बरामद रिवाल्वर समेत अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक कमरे से सुरक्षित निकाली गई 11 वर्षीय परी ने भी बयान दिया है कि उसके पिता अरविंद ने ही उसके भाई शौर्य को गोली मारी थी। परी ने पुलिस को बताया कि अरविंद बच्चों को जान से मारने की धमकी दे रहा था। पुलिस इस बयान को घटनास्थल की परिस्थितियों और अन्य साक्ष्यों के साथ महत्वपूर्ण मान रही है।
पुलिस के अनुसार शौर्य को गोली लगने के बाद भी अरविंद ने पुलिस टीम पर फायरिंग की। बच्चों की सुरक्षा और पुलिसकर्मियों की आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें अरविंद घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
पूरे घटनाक्रम के दौरान एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह मौके पर मौजूद रहे और पुलिस टीम को दिशा-निर्देश देते रहे। पुलिस टीम ने 11 वर्षीय परी और छह माह की बच्ची को सकुशल कमरे से बाहर निकाला। परी की कोहनी के पास मामूली खरोंच आई है।
अब दोनों बच्चियों की जिम्मेदारी उठाएगा पुलिस परिवार
इस घटना में दोनों मासूम बच्चियां माता-पिता के साये से महरूम हो गई हैं। ऐसे में आजमगढ़ पुलिस ने उनके पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा में सहयोग का निर्णय लिया है। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार अपना एक माह का वेतन दोनों बच्चियों के लिए देंगे, जबकि जनपद के पुलिसकर्मी भी अपना एक-एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देंगे।
पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बच्ची के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
