फर्जी दस्तावेजों से शस्त्र लाइसेंस बनवाने का मामला: मुंबई से इबराक खान गिरफ्तार, रिवाल्वर व 33 कारतूस बरामद, 16 साल पहले मुंबई निवासी का आजमगढ़ के गांव का पता दिखा बना था लाइसेंस

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आजमगढ़ के निजामाबाद थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव के पते पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराकर शस्त्र लाइसेंस और अन्य सरकारी लाभ दिलाने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। निजामाबाद पुलिस ने मामले में वांछित 42 वर्षीय इबराक खान को मुंबई से गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से लाइसेंसी 32 बोर की रिवाल्वर, 33 जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस के साथ आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, 29 सितंबर को सूचना मिली थी कि मिर्जापुर निवासी मिर्जा अयाज बेग और उसके सहयोगियों द्वारा बाहरी जिलों व राज्यों में रहने वाले लोगों को मिर्जापुर गांव का निवासी दर्शाकर उनके नाम पर फर्जी पता और कूटरचित अभिलेख तैयार कराए जाते हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस समेत अन्य सरकारी लाभ दिलाने के बदले मोटी रकम लिए जाने की जानकारी सामने आई थी।
जांच में पता चला कि मुंबई के अंधेरी वेस्ट निवासी इबराक खान के नाम वर्ष 2010 में मिर्जापुर गांव के पते पर शस्त्र लाइसेंस संख्या 315/2010 जारी हुआ था। इसके लिए जूनियर हाईस्कूल का स्थानांतरण प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल समेत अन्य अभिलेखों के कूटरचित होने की जानकारी पुलिस को मिली। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड, वोटर आईडी समेत अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
पुलिस टीम ने उच्चाधिकारियों की अनुमति के बाद एक अक्टूबर को मुंबई पहुंचकर थाना ओशिवरा पुलिस के सहयोग से इबराक के पाटलिपुत्र स्थित आवास पर दबिश दी। वहां से उसे गिरफ्तार किया गया। तलाशी में उसके पास से रिवाल्वर और कारतूस के अलावा आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस व पैन कार्ड बरामद हुए। दो अक्टूबर को उसे बांद्रा स्थित न्यायालय में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लिया गया और चार अक्टूबर को आजमगढ़ लाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2025 में इबराक ने मुंबई के अस्थायी पते पर गजट के माध्यम से अपना नाम परिवर्तित कर मो. इबराक खान पुत्र इमदाद खान कराया था, जबकि इसी नाम से वर्ष 2010 में शस्त्र लाइसेंस जारी हुआ था।
इसी तरह मुंबई के अंधेरी वेस्ट निवासी शाहिद मोहम्मद खान के नाम भी वर्ष 2010 में मिर्जापुर के पते पर शस्त्र लाइसेंस संख्या 314/2010 जारी होने की जानकारी मिली है। उसके लाइसेंस में भी कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात जांच में सामने आई है। दोनों के नाम वर्ष 2026 की एसआईआर मतदाता सूची में भी मिर्जापुर के पते पर दर्ज पाए गए, जबकि ग्राम प्रधान की रिपोर्ट, परिवार रजिस्टर और अन्य अभिलेखों के मुताबिक दोनों गांव के निवासी नहीं हैं।
मामले में मिर्जापुर निवासी मिर्जा अयाज बेग की भूमिका भी पुलिस जांच में सामने आई है। आरोप है कि वह बाहरी लोगों को गांव का निवासी दर्शाने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने और शस्त्र लाइसेंस व अन्य सरकारी लाभ दिलाने में सहयोग करता था। जांच में अयाज बेग, उसकी पत्नी, पुत्र और भाइयों सहित परिवार के आठ शस्त्र लाइसेंस होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
इस संबंध में निजामाबाद थाने में मुकदमा अपराध संख्या 245/2026 के तहत धारा 61(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2) बीएनएस तथा 29/30 आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज है। पुलिस का कहना है कि मामले में विवेचना जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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