गोलीकांड में पत्नी समेत तीन की हत्या के बाद घेरेबंदी के दौरान आरोपी ने बच्चे को भी मारी गोली; पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी की भी मौत, बच्चे की भी गई जान

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शंभूपुर गोलीकांड: तीन हत्याओं के बाद बच्चों को बनाया बंधक, पुलिस पर फायरिंग में आरोपी की मौत

07 घंटे तक पुलिस करती रही समझाने का प्रयास, कमरे में गोली चलने के बाद SSP समेत टीम ने तोड़ा दरवाजा; एक बच्चे की मौत, दो को सकुशल निकाला

आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शम्भूपुर गांव में पत्नी समेत तीन लोगों की गोली मारकर हत्या करने के बाद बच्चों को कमरे में बंधक बनाने वाले आरोपी अरविंद कुमार की पुलिस की जवाबी फायरिंग में मौत हो गई। करीब सात घंटे तक पुलिस और परिजन आरोपी को समझाकर आत्मसमर्पण कराने का प्रयास करते रहे। इसी दौरान कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बच्चों की जान बचाने के लिए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस के मुताबिक, 22 सितंबर को शम्भूपुर गांव में अरविंद कुमार पुत्र त्रिपुरारी सिंह ने अपनी पत्नी बबिता सिंह और घर में धार्मिक अनुष्ठान में शामिल अखिलेश मिश्रा तथा महेन्द्र पाठक को गोली मार दी। गोली लगने से तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों और लाइसेंसी हथियार के साथ घर के एक कमरे में खुद को बंद कर लिया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को आत्मसमर्पण करने के लिए लगातार समझाती रही। परिजनों और रिश्तेदारों ने भी उससे बातचीत कर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के अनुसार आरोपी बार-बार बच्चों को गोली मारने की धमकी देता रहा। कई घंटे तक चले प्रयास के बावजूद जब वह बाहर नहीं आया तो पुलिस ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आगे की कार्रवाई की।

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, करीब सात घंटे बाद कमरे के अंदर से अचानक गोली चलने की आवाज आई। इसके बाद बच्चों की जान को तत्काल खतरा देखते हुए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने जोखिम उठाकर कमरे का दरवाजा तोड़ा और अंदर प्रवेश किया। कमरे में आरोपी का नौ वर्षीय पुत्र शौर्य सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। उसे तत्काल लाइफ लाइन अस्पताल, आजमगढ़ भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

इसी दौरान आरोपी अरविंद ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस के मुताबिक, आत्मरक्षा और कमरे में मौजूद बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने नियंत्रित जवाबी फायरिंग की। इसमें अरविंद घायल हो गया। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस टीम ने कमरे से अरविंद की 10 वर्षीय पुत्री परी और छह माह की बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पुलिस के अनुसार बड़ी बेटी की कोहनी के पास मामूली खरोंच आई है, जबकि दोनों बच्चे सुरक्षित हैं।

पुलिस ने बताया कि घटना के पीछे आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहने की बात परिजनों ने बताई है। परिजनों के अनुसार अरविंद की मानसिक स्थिति में सुधार और कथित भूत-प्रेत की बाधा दूर करने के उद्देश्य से घर में पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था। 22 सितंबर को अनुष्ठान का चौथा दिन था। इसी दौरान अरविंद ने कथित रूप से उग्र होकर गोलीकांड को अंजाम दिया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और उपमहानिरीक्षक आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह भी कई घंटे तक घटनास्थल पर मौजूद रहे। पुलिस के अनुसार दोनों अधिकारियों ने मौके पर मौजूद टीम को लगातार दिशा-निर्देश दिए और बच्चों की सुरक्षित निकासी को प्राथमिकता दी गई।

पुलिस ने मृत आरोपी की पहचान अरविंद कुमार पुत्र त्रिपुरारी सिंह, निवासी ग्राम शम्भूपुर, थाना अहरौला, जनपद आजमगढ़ के रूप में की है। गोलीकांड में मारे गए सभी लोगों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार फिलहाल क्षेत्र में कानून-व्यवस्था सामान्य है।

बच्चों को बचाने के लिए कमरे में घुसी पुलिस टीम, 9 वर्षीय बेटे की भी गोली लगने से मौत; दो बेटियों को सकुशल निकाला

आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार को हुई सनसनीखेज वारदात के बाद कई घंटे तक पुलिस और आरोपी के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस के अनुसार, अरविंद कुमार ने अपनी पत्नी बबिता सिंह समेत तीन लोगों की गोली मारकर हत्या करने के बाद अपने तीन बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया और लाइसेंसी असलहे के साथ खुद को कमरे में बंद कर लिया। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पुलिस लगातार आरोपी को आत्मसमर्पण के लिए समझाती रही, लेकिन उसने पुलिस टीम पर भी फायरिंग कर दी। बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में पुलिस की जवाबी फायरिंग में आरोपी घायल हो गया। उपचार के दौरान आरोपी और उसके नौ वर्षीय पुत्र शौर्य सिंह की मौत हो गई।

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 22 सितंबर को शंभूपुर गांव में गोलीकांड की सूचना मिलने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। जांच में सामने आया कि अरविंद कुमार पुत्र त्रिपुरारी सिंह ने अपनी पत्नी बबिता सिंह तथा घर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान में शामिल अखिलेश मिश्रा और महेन्द्र पाठक को गोली मार दी। गोली लगने से तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

परिजनों ने पुलिस को बताया कि अरविंद की मानसिक स्थिति पहले से ठीक नहीं रहती थी। परिजनों के अनुसार, उसकी मानसिक स्थिति खराब होने का कारण भूत-प्रेत की बाधा माना जा रहा था। इसी वजह से उसकी स्थिति में सुधार और कथित बाधा दूर करने के उद्देश्य से घर पर पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था। मंगलवार को अनुष्ठान का चौथा दिन था। इसी दौरान अरविंद के उग्र होने और गोलीकांड को अंजाम देने की बात सामने आई है। यह विवरण पुलिस ने परिजनों के हवाले से बताया है।

तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों और लाइसेंसी हथियार के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया। पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार समझाने का प्रयास किया। परिजन और रिश्तेदार भी उसे समझाते रहे, लेकिन पुलिस के अनुसार आरोपी बार-बार बच्चों को गोली मारने की धमकी देता रहा।

इसी दौरान कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। बच्चों की जान खतरे में देख पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। पुलिस के मुताबिक, अंदर अरविंद का नौ वर्षीय बेटा शौर्य सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। उसे तत्काल लाइफ लाइन अस्पताल आजमगढ़ भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, पुलिस टीम के कमरे में प्रवेश करने के दौरान अरविंद ने पुलिसकर्मियों पर भी फायरिंग कर दी। बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा के लिए पुलिस ने नियंत्रित एवं संयमित जवाबी फायरिंग की, जिसमें अरविंद घायल हो गया। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस टीम ने कमरे से अरविंद की 10 वर्षीय पुत्री परी और छह माह की पुत्री को सकुशल बाहर निकाल लिया। पुलिस के अनुसार, बड़ी बेटी की कोहनी के पास मामूली खरोंच आई है, जबकि दोनों बच्चे सुरक्षित हैं।

घटना की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और आजमगढ़ परिक्षेत्र के उपमहानिरीक्षक सुनील कुमार सिंह भी कई घंटे तक घटनास्थल पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने मौके पर पुलिस टीम को लगातार दिशा-निर्देश दिए। पुलिस का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए टीम ने त्वरित कार्रवाई की और दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।

मृत आरोपी की पहचान अरविंद कुमार पुत्र त्रिपुरारी सिंह, निवासी ग्राम शंभूपुर, थाना अहरौला, जनपद आजमगढ़ के रूप में हुई है। आरोपी समेत सभी मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। घटनास्थल पर फॉरेन्सिक टीम द्वारा साक्ष्य संकलन किया जा रहा है। मामले में अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई जारी है। पुलिस के अनुसार, मौके पर कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है।

घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर एडीजी वाराणसी नवीन अरोड़ा डीआईजी सुनील सिंह समेत अन्य अधिकारी रहे।

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