
आजमगढ़। साइबर ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर गंभीरपुर निवासी एक व्यक्ति को देशद्रोह के मुकदमे में फंसाने का भय दिखाया और डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर 26.70 लाख रुपये की ठगी कर ली। इस मामले में आजमगढ़ साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने दूसरे आरोपी उमान अली (24) को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से मोबाइल फोन, चार सिम कार्ड, तीन एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और 1,770 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, गंभीरपुर निवासी राधेश्याम यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पास अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल आई थी। कॉल करने वालों ने खुद को सीआईओ अधिकारी बताते हुए उनके बैंक खाते से गलत लेनदेन होने और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने की बात कही। आरोपियों ने गिरफ्तारी का भय दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने नियंत्रण में रखा और विभिन्न खातों में 26 लाख 70 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए।
पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। विवेचना के दौरान पुलिस ने इस मामले में जहांगीर आलम निवासी अमीनाबाद, लखनऊ को 20 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उमान अली निवासी तालाब गगनी शुक्ल, लखनऊ का नाम सामने आया। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसे लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर लोगों को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देता था। इसके बाद गिरफ्तारी से बचाने का झांसा देकर पीड़ितों से रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेता था।
गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ आजमगढ़ साइबर क्राइम थाने में दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक यातायात एवं साइबर क्राइम के नोडल अधिकारी पंकज कुमार श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी अपराध/साइबर क्राइम कौस्तुभ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में की गई।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक राजकुमार सिंह, उपनिरीक्षक रजत सिंह तथा कांस्टेबल एजाज खान, सभाजीत मौर्य, संजय कुमार और महिपाल यादव शामिल रहे।
