रूस की जंग ने निगल लिए आजमगढ़ के सपने: न शव मिला, न आखिरी दीदार… बस वर्दी और झंडा ही लौटे घर
रोटी की तलाश में घर से निकले बेटे की आज भी राह देख रहा अपाहिज पिता, पत्नी की आंखें हर दस्तक पर ठहर जाती हैं“जो घर से निकले थे रोटी की तलाश में,लौटे तो बस कुछ यादों का सामान बनकर।न कंधा मिला अपनों का, न आखिरी दीदार,अधूरी रह गई हर मां-बाप की पुकार।” आजमगढ़। गरीबी […]
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